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आरक्षण ::कुछ जवाब खोजते अनुत्तरित प्रश्न

Posted On: 16 Dec, 2012 Others में

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समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े व्यक्तियों को अवसर प्रदान करने हेतु आरक्षण का प्राविधान किया गया है . इस बात से सभी सहमत हैं किजातियों का प्रादुर्भाव बहुत बाद में हुआ है और यह सामाजिक बुराई के रूप में चिन्हित किया जाता रहा है . बड़े बड़े संत -महात्माओं ने इसका विरोध किया और अब भी किया जा रहा है इसी विषय पर मैंने अपना ब्लॉग “जातिवाद और धनबल की बात क्यों चुनाव के समय ही याद आती है “भी लिखा था . आज इसी बुराई को और बढाने हेतु आरक्षण का प्राविधान किया जा रहा है तथा अब और भी बढाने हेतु आरक्षण को विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है ,क्योकि २०१४ में चुनाव आने वाला है .यदि जाति प्रथा हिन्दू समाज की एक बुराई है तो फिर उसे और भी दृढ़तर करने का प्रयास शासन द्वारा क्यों किया जा रहा है जबकि रुढियों को तोड़ने का यह एक समीचीन अवसर है .आरक्षण से जुड़े बहुत से सवाल घुमड़ते रहते हैं जिनका आज तक कोई उत्तर नहीं मिला . यदि आपको ज्ञात हो तो कृपया उत्तर देने का कष्ट करिएगा , बड़ी कृपा होगी .
१.क्या पुरे वर्ग विशेष को आरक्षण दिया जाना उचित है , जबकि आरक्षण की मंशा पिछड़ों को बढाने की है तो आरक्षण वर्ग विशेष के सामाजिक , आर्थिक रूप से विकसित लोगों को क्यों ?
२-जब आरक्षण का मतलब सामाजिक न्याय बताया जा रहा है तब एक सामाजिक ,आर्थिक रूप से विकसित वर्ग में भी पिछड़े लोग होंगे तो उन्हें आरक्षण क्यों नहीं ?
३- क्या आरक्षण का मतलब किसी वर्ग विशेष , समुदाय विशेष ,या व्यक्ति विशेष को जबरदस्ती आगे बढ़ाना है , चाहे योग्यता हो या न हो ?
४-आरक्षण का मतलब यदि व्यक्ति, समुदाय ,वर्ग विशेष को आत्मनिर्भर बनाना है तो फिर आरक्षण जन्म जात क्यों ?
५-एक समृद्ध व्यापारी , बड़े नेता , आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति ने आरक्षण का उपयोग किया तो फिर उनके पालितों को आरक्षण क्यों ?
६-आज आरक्षण लागू होने के बाद केवल एक वर्ग को आरक्षण क्यों , गरीब व्यक्ति को आरक्षण क्यों नहीं ?
७ -जनसंख्या के आधार पर कोटा मांगना क्या जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा नहीं देता ? क्या वर्ग विशेष नहीं सोचता किजीतनी जनसंख्या हमारी होगी , हमारी गलत बात भी उतनी मानी जायेगी ?
८-दो बच्चों से ज्यादा के माता -पिता को आरक्षण के लाभ से क्यों नहीं वंचित किया जाता है ?
९-आरक्षण की एक समय सीमा निर्धारित है तो आखिर क्या कारण है कि उस समय सीमा को बार बार क्यों बढाया बढाया जा रहा है ? क्या यह सरकारी नीतियों की विफलता के कारण हो रहा है ? यदि नहीं तो क्या यह राजनीति से प्रेरित नहीं है ?
१० -जब पुलिस की भर्ती में आरक्षण है तो सेना , अर्धसैनिक बलों की भर्ती में आरक्षण क्यों नहीं ? क्या सेना कमजोर हो जायेगी ?यदि हाँ तो फिर देश को क्यों कमजोर किया जा रहा है , आरक्षण से ?
११ – यदि आरक्षण का मतलब सामाजिक न्याय दिलाना है तो फिर वर्ग विशेष न होकर एक स्तर के व्यक्ति होने चाहिए , क्या यह उचित नहीं होगा ?
१२ -अल्पमत की सरकार का निर्णय पुरे देश पर जबरदस्ती थोपा जाय , क्या इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जरुरी नहीं है ?
१३ – क्या इस आरक्षण नीति से एक समुदाय विशेष में सुविधा भोगी एक ख़ास वर्ग पैदा नहीं हो गया है जो आरक्षण का उपभोग कर रहा है और जरुरत मंदों को आरक्षण सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है ?
१४ – क्या सरकार अपनी आरक्षण नीति से सभी सुविधा भोगी समुदायों में पुराने जमींदारों की तरह एक सशक्त वर्ग नहीं पैदा कर रही है जो उस वर्ग में प्रभाव बनाए तथा कमजोरों पर शासन करे और सुविधा का उपयोग करे ?
१५ -क्या सरकार की नीति से समाज की कमजोर इकाई लाभान्वित हो रही है या उस वर्ग की समृद्ध इकाई ही उसका लाभ ले रही है ?
१६ – जब एक निबल परिवार रोजी रोटी के प्रयास में ही लीन रहेगा तो उस वर्ग के समृद्ध लोग आरक्षण का लाभ ले लेगें वह इकाई तो और भी गरीब होती जायेगी , क्या यह उचित है ?
१७ – आरक्षण गरीब को और गरीब बनाने की योजना की एक सोची समझी रणनीति है . गरीब इकाई के पालितों को आत्मनिर्भर होने के लिए पढ़ने -लिखने , खाने -पीने की सभी सुविधाएं सरकार क्यों नहीं देती ताकि वे किसी भी प्रतियोगिता में सफल हो सकें . उन्हें केवल सुविधा भोगी न बनावे , क्या यह उचित नहीं होगा ?
१८ – वर्ग विद्वेष को न भड़काया जाय , समाज को टुकड़ों में न बांटा जाय . देश को एक करने के लिए आरक्षण पढ़ाई -लिखाई , खाने -पीने एवं अन्य सुविधाओं में दिया जाय , फिर खुली प्रतियोगिता के लिए उन्हें छोड़ दिया जाय , क्या यह उचित नहीं होगा ?
१९ – क्या देश हित के इस मामले को प्रेस ने ठीक ढंग से उठाया है ? यदि नहीं तो प्रेस डर क्यों रहा है ?
२० – क्यों आरक्षण सुविधा पाए लोग सता संचालक वर्ग में शामिल होकर पुनः आरक्षण सुविधा का लाभ ले रहे हैं ?यह आरक्षण चाहने वाले गरीब लोगों के साथ अन्याय नहीं है क्या ?
२१ – गरीब की जाति कौन सी होती है ? दो जून की रोटी या कुछ और ?
२२ – विश्व के किस भाग में जाति आधारित आरक्षण है ?भारत में इतने दिनों तक क्यों ?
२३ – क्या सरकार समुदाय विशेष में हीन भावना उत्पन्न नहीं कर रही है ?
२४ – पुनः और पुनः आरक्षण सुविधा का लाभ एक समुदाय विशेष में क्या एक वर्ग नहीं ले रहा है ?
२५ – क्या आरक्षण सुविधा पाए व्यक्ति की अपने समुदाय के प्रति जिम्मेदारी नहीं है ? यदि वे आरक्षण सुविधा का लाभ कई बार ले चुके हैं तो क्या वह उस समुदाय के प्रति गद्दारी नहीं है ?
२६ – आरक्षण सुविधा पाए संवर्ग के वेतन का १०%कटौती कर क्यों नहीं एक फंड बनाया जाता जो गरीबों के हित में खर्च हो , क्या यह उचित नहीं होगा ?
२७ -आरक्षण कितनी बार दिया जाना न्यायोचित है ? पढ़ाई के समय , प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के समय ,प्रतियोगी परीक्षा में चयन के समय . अब प्रमोशन में भी आरक्षण . क्या यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुकूल है ?अथवा केवल वोट की राजनीति की जा रही है ?
२८ क्या प्रमोशन के हर चरण में आरक्षण दिया जाना उचित है ?
पुनः आप सभी से अनुरोध है कि यदि उक्त के जवाब आपके पास हों तो अवगत कराने की अनुकम्पा दर्शाने की कृपा करें . धन्यवाद .

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sunny7827 के द्वारा
March 9, 2013

माननीय श्री कृष्णा श्री ! क्षमा चाहता हु की आपका लेख बहुत देर से पद पाया. लेकिन धन्यवाद् देना चाहूँगा आपकी पहल के लिए. किसी और के पास इतना साहस नहीं है की वह ऐसा कर पाए. यहाँ में एक सुझाव देना चाहूँगा की आरक्षण प्रतिभा के आधार पर देना चाहिए चाहे अवसर केसा भी हो. यही इसका उपाय और इलाज है ! आपके जवाब के इंतज़ार में………. सनी हाड़ा, इंदौर (मध्य प्रदेश) sunnyhada2007@rediffmail.com

rdverma1 के द्वारा
December 25, 2012

No other person needs to reply the questions you pose to raise. Read thoroughly all question be self critic and you will find answers of all questions. Who divided Hindu Samaj ? Who made castes? what was the need and what was the criteria ?What was the purpose of categorising the persons in Varnas? please try to read the minds of forefathers. Again if you are hindu you must be knowing that it was compulsory to separate 1/6 of earnings to be donated to have nots. No one(Individual or group or caste or religion or political party) has shown courage to pressurize central or state government leadership to get prepared the list of have nots.Why? Who are afraid of poors? The answer is rich class and the class opposing reservation. You know “vibhukshita kim na karoti papum” So don`t keep hungry around your self. If still remains anything unanswered please do write to me.

    krishnashri के द्वारा
    December 26, 2012

    आदरणीय वर्मा जी , सादर ,आपने अपनी विस्तृत प्रतिक्रया दी ,इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूँ . मेरी अंग्रेजी उतनी अच्छी नहीं है . आपने पूछा है कि किसने हिन्दू समाज को बांटा , किसने जाति बनाई , इत्यादि ,इत्यादि . आपको पूछने का हक़ है . इससे सम्बंधित मैंने एक ब्लॉग लिखा था जिसका उल्लेख इस ब्लॉग में भी है .कृपया एक बार दृष्टिपात करने कि कृपा करें मैं कृतार्थ होउंगा . पुराने समय में समाज को चलाने के लिए कार्य विभाजन कर किया गया , मेरे विचार से इस प्रकार जातियां बनती गई . मेरा यही प्रश्न है कि जाति प्रथा का बहुत विरोध किया जाता है फिर उसे बनाए रखने के लिए जातिगत आरक्षण क्यों ?जैसाआपने भी “पुअर ” की हिमायत की है .गरीब की कोई जाति नहीं होती है , केवल भूख उसकी जाति होती है . जिस दिन जाति प्रथा टूटेगी समाज की बहुत सी गन्दगी स्वमेव साफ हो जायेगी . जो उस समय गलत था आज उसे बनाए रखने का प्रयास क्यों किया जा रहा है .उसे सही साबित करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है ? आप विद्वान हैं स्वयं सोचे . क्या यह उचित है ? ब्लॉग पर प्रथम बार पधारने के लिए धन्यवाद .कृपा बनाए रक्खें , पुनः धन्यवाद .

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 19, 2012

श्रद्धेय वर , आप ने सच को बड़ी ही निर्भीकतापूर्वक कहने का साहस किया ! तदर्थ हार्दिक आभार !

    krishnashri के द्वारा
    December 21, 2012

    आदरणीय आचार्य जी , सादर , यह तो आप लोगों के साथ तथा जे जे जेइसे मंच का प्रभाव है , धन्यवाद .

akraktale के द्वारा
December 19, 2012

आदरणीय श्रीकृष्णा श्री जी सादर, जो प्रश्न आपके मन में है वह देश के हर उस नागरिक के मन में है जो आरक्षण के कारण योग्यता होने पर भी मंजिल नहीं पा रहा है. आज आरक्षण के कारण ऐसी विसंगति पैदा हो गयी है कि जहां एक अनारक्षित कर्मचारी पिछले लगभग ३० वर्षों में कोई पदोन्नति नहीं  पा सका है वहीँ आरक्षण के कारण दूसरा कर्मचारी मात्र २२ वर्षों में  नौकरी पाने के बाद तीन पदोन्नतियां ले चुका है. ऐसी विसंगतियाँ क्या समाज के लिए ठीक हैं? प्रश्न सदैव मन में बने रहते हैं. जब तक संसद में अच्छे लोग नहीं जायेंगे ये प्रश्न बने ही रहेंगे. 

    krishnashri के द्वारा
    December 21, 2012

    आदरणीय रक्ताले जी , सादर , आपने मेरी बात को आगे बढाया ,धन्यवाद .

ANAND PRAVIN के द्वारा
December 19, 2012

आदरणीय कृष्ण सर, सादर प्रणाम सर्वप्रथम सर एक बात कहना चाहूँगा की आपकी लेखन शैली का मैं अपने जे जे पर आरम्भ से ही मुरीद रहा हूँ तथा कुछ सिखने की कोशिश करता रहा हूँ………………. आरक्षण एक समस्या है और इसकी सबसे अजीब और सजीव तथ्य यह है की हम सभी जानते हैं की यह एक समस्या है………….जिन्हें मिल रहा है वह भी जिन्हें नहीं मिल रहा वह भी, किन्तु कुछ राजनीतिक रोटियां सेक रहें हैं तो कुछ अपनी मुफ्त की रोटियां तोड़ रहे हैं वास्तविकता यह है की यदि दोषपूर्ण रूप से आप समाज को आपस में बाँट कर रखेंगे तो धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्द अपने अर्थों को परिभाषित करने की मांग करेंगे ही………. आरक्षण को आरक्षण के रूप में ही रहने देना चाहिए जिन्हें मिलना चाहिए था वो आजभी अभाव में हैं ………………और जिन्हें नहीं मिलना चाहिए उसे खुलेआम मिल रहा है इन सबों में वास्तविक दुर्गति उन छात्रों की हो रही है जो सरकारी नौकरियों में अपनी भविष्य को तलासते हैं सुन्दर और सार्थक लेख सर……

    krishnashri के द्वारा
    December 21, 2012

    प्रिय आन्नद जी , सादर , यह आपलोगों का बड़प्पन है कि आप ऐसा सोचते हैं मैं तो बस साधारण इंसान हूँ . अब सरकारी नौकरियों में वही जा रहे हैं जिन्हें कहीं काम नहीं मिलता . आंकड़े गवाह हैं .प्रतिक्रया हेतु धन्यवाद .

munish के द्वारा
December 18, 2012

आदरणीय श्रीजी सादर अभिवादन, इन सारे प्रश्नों का एक ही उत्तर है ” वोटबैंक की राजनीति के कारण हो रहा है “

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय मुनीश जी , सादर , बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए ,आपका कथन सही है , धन्यवाद .

yogi sarswat के द्वारा
December 18, 2012

क्या आरक्षण का मतलब किसी वर्ग विशेष , समुदाय विशेष ,या व्यक्ति विशेष को जबरदस्ती आगे बढ़ाना है , चाहे योग्यता हो या न हो ? डॉ भीमराव आंबेडकर ने जिस नीयत से आरक्षण की प्रासंगिकता को रखा था , आज वो कहीं नहीं रही है ! जिस वर्ग को मिलना चाहिए था वो आज भी ज्यूँ का त्यूँ है लेकिन जो चालक किस्म के लोग थे उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया और अब भी प्रोन्नति में भी इस बैठे बिठाये लाभ से वंचित नहीं रहना चाहते ! बहुत सटीक लेखन है आपका श्री कृष्णा श्री जी

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय योगी जी , सादर , आपने प्रश्नों पर सहमति दी ,धन्यवाद .

vinitashukla के द्वारा
December 18, 2012

वोट बैंक को कायम रखने के लिए, आरक्षण के नित- नये प्रावधान करने की जो प्रवृत्ति है- उसका कोई उपाय जनता के पास नहीं है. लाजवाब करने वाले प्रश्न उठाती हुई सार्थक, सामयिक पोस्ट. बधाई और साधुवाद.

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय महोदया , सादर , जनता के पास उपाय है , वोट का समुचित प्रयोग . धन्यवाद

    vinitashukla के द्वारा
    December 18, 2012

    सच कहा आपने, किन्तु जब सभी राजनैतिक दल इस दुराग्रह से सहमत हों( या फिर इसका विरोध न करते हों)- तो जनता के पास कौन सा विकल्प बचता है?

    krishnashri के द्वारा
    December 21, 2012

    आदरणीय महोदया , इस प्रजातांत्रिक समाज में केवल एक विकल्प बचता है अपनी बात कहना और अपने मत का समुचित प्रयोग करना . अन्यथा प्रयोग से समाज टूट जाएगा .

mayankkumar के द्वारा
December 17, 2012

आपकी कलम यथार्थ, तथ्‍यपरक व रोचक लगी, पढ्कर क़तज्ञ हुआ, हमारे ब्‍लाूग्‍ पर भी अपनी अमूल्‍य प्रतिक्रिया दें । सधन्‍यवाद ।

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    स्नेही कुमार जी , सादर , आपको प्रश्न रोचक लगे ,धन्यवाद .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 17, 2012

इन बिन्दुओं को नोट कर लिया है. काम आएगा. सादर

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    धन्यवाद .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 17, 2012

आदरणीय श्री जी, सादर अभिवादन. स्वास्थ्य कारणों से विस्तृत टिप्पणी न दे पाने हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ. मेरी पोस्ट आग कुछ तो कहती ही है. मंथन हेतु प्रस्तुत रचना के लिए बधाई. शायद लोगों के दिमाग की बत्ती जले.

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी , सादर , लोग इतने दब चुके हैं कि अब सोचने के अतिरिक्त कोई समाधान शेष नहीं है . आप जल्दी स्वस्थ हों , यही कामना है .

Ashish Mishra के द्वारा
December 17, 2012

रही बात जातिबाद की तो सरकार तो इसको किसी कीमत पर ख़तम होने ही नहीं देना चाहती वरना हर सरकारी काम में जाती क्यों पूछी जाती, जाति की संख्या देखकर राजनितिक दल टिकिट क्यों देते. क्यों नहीं सभी सरकारी कागजो से जाति का कालम हटा दिया जाता?? क्यों कराई जताई जातिगत जन- गणना ????

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    स्नेही मिश्रा जी , नमस्कार , जाति वादी व्यवस्था कानून से ख़त्म नहीं होगी , इसे हमें आपको ख़त्म करना होगा . धन्यवाद .

Ashish Mishra के द्वारा
December 17, 2012

इनमे से कोई भी प्रशन अनुत्तरित नहीं है वरन सबका एक ही उत्तर है “वोट बैंक की गन्दी राजनीती” और सवर्ण वर्ग की उदासीनता.

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    स्नेही मिश्रा जी , सादर , आपने प्रतिक्रया दी धन्यवाद .

nishamittal के द्वारा
December 17, 2012

आदरनीय श्री कृष्ण जी,आपका एक एक प्रश्न खरा और आम पीड़ित आदमी की पीड़ा है,संविधान में इतने संशोधन हुए तो एक संशोधन क्यों नहीं की गरीब चाहे जिस वर्ग से हो उसको उसके समर्थ होने तक विशिष्ठ सुविधाएँ मिलेंगी

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय महोदया , सादर , यही तो मैं भी कह रहा हूँ प्रश्नों से सहमति जताने हेतु धन्यवाद .

omdikshit के द्वारा
December 16, 2012

कृष्णा जी, नमस्कार. आप ने ऐसे प्रश्नों की झड़ी लगा दी ,जिसका १००%उत्तर देना संभव नहीं है ,क्योंकि हमारे नेता ,हरिजनों को मुख्य-धारा में ,देखना ही नहीं चाहते और हमेशा उन्हें यह एहसास दिलाते रहना चाहते हैं कि तुम नौकरी में आते समय जो थे,हर स्तर पर तुम वही रहोगे.तुम्हारा वजूद अन्य जातियों से अलग है और रहेगा.यदि सभी मिल जायेंगे तो ….उनकी राजनीति का क्या होगा?

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय दीक्षित जी , सादर , ये मेरे प्रश्न नहीं हैं बल्कि ये प्रत्येक भारतीय के मन में घुमड़ रहे हैं , प्रतिक्रया हेतु धन्यवाद .

December 16, 2012

सादर प्रणाम! हार्दिक आभार सर, आप द्वारा उठाया गया हरेक प्रश्न विचारणीय है……………………………परन्तु सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि सब कुछ सही था तो आज भारत बर्ष में ऐसे प्रश्न उत्पन्न क्यों हुए क्योंकि इसका जिम्मेद्दार कोई एक व्यवस्था विशेष नहीं है ………………………………………….?

    krishnashri के द्वारा
    December 18, 2012

    प्रिय अलीन जी , सप्रेम स्नेह , आपने प्रश्नों से सहमति जताई धन्यवाद .


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