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मंगल कामना

Posted On: 16 Feb, 2013 में

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हो कृष्ण-कृष्ण मय जड़ जंगम ,
सुरभित संयोग मधुर संगम ,
बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर /
.
बिंदिया ,झुमका ,कंगन, पायल
खुशियों में आज मचलते हैं /
बेला, जूही,चन्दन, गुलाब ,
खुशबु से तेरी महकते हैं //
बन कर आशा के दीप जलो इस छाजन पर //
.
दमके घर आँगन द्वार सभी
ऐसा हो रूप श्रृंगार तेरा /
हो फली भूत सपने सबके
सबसे हो सद्व्यवहार तेरा //
बन कर नयनों की ज्योति दिखो तुम माथे पर //
.
हो राज तुम्हारा इन्दर सा
सबसे उत्तम व्यवहार रहे /
रुनझुन ध्वनियाँ घर में गूंजे
खुशियों से भरा संसार रहे //
धर कर चन्दन का रूप सजो तुम माथे पर //
बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर //
.
हो सुन्दर तुम सुन्दरतम हो
सुख शान्ति यही कामना है/
नेहा ,नलिनी के संग सुधा
स्वागत में कृष्ण ,भावना है //
आशीष हमारा संग तेरे सिंदूर सजे तेरे माथे पर //
बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर

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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhagwanbabu के द्वारा
February 25, 2013

सुन्दर….. सुन्दर…… बहुत सुन्दर…… आनन्द आ गया…….. http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/02/22/सेक्स-से-खिलवाड़-–-jagran-junction-forum/

    krishnashri के द्वारा
    February 26, 2013

    आदरणीय भगवान बाबू , सादर , मेरे ब्लॉग पर आपके प्रथम आगमन पर आपका स्वागत है . सुन्दर प्रतिक्रया हेतु धन्यवाद

aman kumar के द्वारा
February 22, 2013

हो सुन्दर तुम सुन्दरतम हो सुख शान्ति यही कामना है/ नेहा ,नलिनी के संग सुधा स्वागत में कृष्ण ,भावना है // आशीष हमारा संग तेरे सिंदूर सजे तेरे माथे पर // बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर सुंदर ! अति सुंदर

    krishnashri के द्वारा
    February 23, 2013

    आदरणीय कुमार जी , सादर ,उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद .

manoranjanthakur के द्वारा
February 21, 2013

जय श्री कृष्णा ….उम्दा ….बहुत बधाई

    krishnashri के द्वारा
    February 21, 2013

    आदरणीय ठाकुर जी , सादर , बहुत बहुत धन्यवाद

vinitashukla के द्वारा
February 20, 2013

सुन्दर मंगलकामना संजोये हुए, उत्कृष्ट अभिव्यक्ति. बधाई आपको.

    krishnashri के द्वारा
    February 21, 2013

    आदरणीय महोदया , सादर , आपने उत्साह बढाया धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
February 20, 2013

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वसुदेव!

    krishnashri के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय , आपने निस्तब्ध कर दिया ,धन्यवाद

Santosh Kumar के द्वारा
February 19, 2013

श्रद्धेय ,..सादर प्रणाम अतिसुन्दर मंगल कामना पर लिखने को मूरख के पास शब्द नहीं हैं ,..हो राम-कृष्ण मय जड़ जंगम !….शत शत अभिनन्दन ,,,,सादर

    krishnashri के द्वारा
    February 20, 2013

    स्नेही संतोष जी , सादर , बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए . सराहने के लिए धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
February 19, 2013

दमके घर आँगन द्वार सभी ऐसा हो रूप श्रृंगार तेरा / हो फली भूत सपने सबके सबसे हो सद्व्यवहार तेरा // बन कर नयनों की ज्योति दिखो तुम माथे पर / यही मंगल कामना और मंगल भावना रहे ! बहुत सुन्दर शब्द आदरणीय कृष्णा श्री जी !

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय योगी जी , सादर , आपने पसंद किया ,सराहा बहुत बहुत धन्यवाद .

jlsingh के द्वारा
February 18, 2013

हो कृष्ण-कृष्ण मय जड़ जंगम , सुरभित संयोग मधुर संगम , बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर / …….. हो राज तुम्हारा इन्दर सा सबसे उत्तम व्यवहार रहे / रुनझुन ध्वनियाँ घर में गूंजे खुशियों से भरा संसार रहे // धर कर चन्दन का रूप सजो तुम माथे पर // बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर // आदरणीय कृष्ण श्री महोदय, सादर अभिवादन! इसके आगे कोई पंक्ति जोड़ी जाय मुझे समझ में नहीं आ रहा! यथेष्ठ बधाई के पात्र है आप !

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय सिंह साहब , सादर ,आपने पसंद किया आपको अच्छा लगा धन्यवाद . आगे आपका आदेश चार लाइने और लिख देता हूँ . होसुन्दर तुम सुन्दरतम हो सुख शान्ति यही कामना है / नेहा , नलिनी के संग सुधा स्वागत में कृष्ण भावना है आशीष हमारा संग तेरे , सिंदूर सजे तेरे माथे पर //

Santlal Karun के द्वारा
February 18, 2013

आदरणीय कृष्णश्री जी, आप ने सजीव दृश्य-घ्राण-पौराणिक बिम्बों के सफल विधान के साथ मंगल-भावना का अत्यंत उत्कृष्ट स्मरणीय गीत रचा है | हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय करुण जी सादर , आपको पसंद आई , आपने सराहा ,धन्यवाद .

seemakanwal के द्वारा
February 18, 2013

आदरनीय सर जी अति सुन्दर काव्यात्मक मंगल कामना . हार्दिक आभार .

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय महोदया सादर ,समय निकालने ,पढ़ने एवम प्रतिक्रिया देने हेतु आभार .

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 18, 2013

अत्युत्तम काव्य प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ! सादर !

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय आचार्य जी , सादर , उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद

Sushma Gupta के द्वारा
February 18, 2013

आदरणीय कृष्णा श्री जी, आपकी यह सुन्दर अभिव्यक्ति पूर्ण रचना मानो सारी प्रकृति को ही मस्तक पर सजाती सी प्रतीत होती है ,सुन्दर व् मधुर भावो से भरी हुई इस रचना हेतु साभार वधाई…

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय महोदया , सादर , कविता के मर्म को समझने हेतु धन्यवाद .

    krishnashri के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरणीय महोदया , सादर ,प्रतिक्रया हेतु आपका धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
February 17, 2013

आदरणीय श्री कृष्णश्री जी ,भक्ति रस से सराबोर अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

    krishnashri के द्वारा
    February 18, 2013

    आदरणीय महोदया , सादर ,प्रतिक्रया हेतु धन्यवाद .

omdikshit के द्वारा
February 17, 2013

आदरणीय कृष्णा जी, नमस्कार ।     बहुत ही सुन्दर संगम संयोग ,भक्ति और सौन्दर्य का.बधाई.

    krishnashri के द्वारा
    February 17, 2013

    आदरणीय दीक्षित जी , सादर , प्रतिक्रया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 17, 2013

अति सुन्दर भाव युक्त रचना आदरणीय श्री जी, सादर अभिवादन सदेव हमें सिंचित करते रहें बधाई.

    krishnashri के द्वारा
    February 17, 2013

    आदरणीय कुशवाहा जी , सादर , कविता के मर्म को समझने के लिए धन्यवाद .

nishamittal के द्वारा
February 16, 2013

आदरनीय श्री कृष्ण जी ,भक्ति भाव पूर्ण रचना पर बधाई आपको.

    krishnashri के द्वारा
    February 17, 2013

    आदरणीय महोदया , सादर ,उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार .

shashibhushan1959 के द्वारा
February 16, 2013

आदरणीय कृष्ण श्री जी, सादर ! एक बहुत शानदार, लयबद्ध और साहित्यिक रचना ! “”हो राम-कृष्ण मय जड़ जंगम , सुरभित संयोग मधुर संगम , बन कर उषा के फूल सजो तुम माथे पर !”" संग्रहणीय रचना ! हार्दिक बधाई !

    krishnashri के द्वारा
    February 17, 2013

    आदरणीय शशिभूषण जी सादर , आपने इतना मान दिया , धन्यवाद . हार्दिक आभार .


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